CM Anil Baluni उत्तराखंड को जल्द नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है। अभी तक मिले संकेत बता रहे हैं कि धामी पार्ट टू का फार्मूला असन्तुष्ट नेताओं के चलते पिछड़ रहा है और अब केंद्र ने नया चेहरा लगभग तय कर लिया है।
CM Anil Baluni अनिल बलूनी हैं मोदी के भरोसेमंद
CM Anil Baluni
बहुत संभावना प्रबल है कि राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का नाम केंद्र इसी हफ्ते घोषित कर सकती है। CM Anil Baluni सूत्र बताते हैं कि यही वो अनिल बलूनी हैं जिस पर त्रिवेंद्र और तीरथ सरकार के इस्तीफे के बाद से ही सीएम बनने के कयास लगाए जा रहे थे।
CM Anil Baluni
बीते पांच साल के दौरान त्रिवेंद्र , तीरथ और धामी सरकार में भी केंद्रीय मंत्रियों से बलूनी लगातार पहाड़ से जुड़ी CM Anil Baluni बड़ी योजनाओं पर स्वीकृतियां दिलाते रहे हैं । इसके साथ साथ पलायन को रोकने और रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए चलाया गया अभियान भी उनकी लोकप्रियता को पहाड़ में बढ़ाता रहा है .…लिहाज़ा सांसद अनिल बलूनी के नाम पर केंद्र भरोसा जताते हुए उन्हें 2022 से 2027 के लिए उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री घोषित कर सकता है.….
CM Anil Baluni
आपको बता दें कि बीते कुछ दिनों से उत्तराखंड के CM Anil Baluni मुख्यमंत्री के नाम पर कई विधायकों ने दावेदारी पेश की थी। जिसमें सबसे आगे निवर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उसके बाद सतपाल महाराज और फिर अजय भट्ट , निशंक जैसे बड़े नाम शामिल रहे हैं।
लेकिन सभी समीकरण को साधते हुए CM Anil Baluni आखिरकार केंद्र क्या एक सांसद के नाम पर या यूं कहें पूर्व संभावित नाम अनिल बलूनी का घोषित कर सबको यह संकेत दे सकती है कि अब केंद्र अपने हिसाब से उत्तराखंड में पूरे 5 साल के लिए स्थाई सरकार चलाने का मन बना चुकी है…..
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पत्रकारिता से देश की सबसे बड़ी पार्टी के मुख्यमंत्री दावेदार तक का सफर तय करने वाले अनिल बलूनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र के तमाम मंत्रियों का बेहद करीबी बताया जाता है। CM Anil Baluni यही वजह है कि जब उन्हें मोदी सरकार ने पार्टी का राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बनाया तो अनिल बलूनी ने अपनी काबिलियत साबित की और मीडिया में पार्टी के लिए जमकर जिताऊ बैटिंग की।
CM Anil Baluni चलिए आपको बताते हैं कि आखिर अनिल बलूनी है कौन ?
CM Anil Baluni
अनिल बलूनी का जन्म 2 सितंबर 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के कंडवालस्यु में हुआ था । केंद्र के भरोसेमंद अनिल बलूनी युवावस्था से राजनीति में सक्रिय रहे। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री , निशंक सरकार में वन्यजीव बोर्ड में उपाध्यक्ष, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और फिर राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख बने अनिल बलूनी 26 साल की उम्र में सक्रिय चुनावी राजनीति में उतर आए और राज्य के पहले विधानसभा चुनाव 2002 में कोटद्वार सीट से पर्चा भरा था । CM Anil Baluni लेकिन उनका नामांकन पत्र निरस्त हो गया इसके खिलाफ रिपोर्ट गए थे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कोटद्वार में उपचुनाव लड़ा लेकिन हार गए । इसके बाद भी वह लगातार पहाड़ में सक्रिय रहे बलूनी पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय थे और दिल्ली में संघ परिवार के दफ्तरों में मेलजोल बढ़ाते हुए नेताओं के संग घूमते दिखते थे।
CM Anil Baluni इसी दौरान संघ के जाने-माने नेता सुंदर सिंह भंडारी से उनकी नजदीकियां बढ़ने लगी और सुंदर सिंह भंडारी को जब बिहार का राज्यपाल बनाया गया तो भंडारी अपना ओएसडी यानी अपना ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी बना कर अपने साथ ले गए। इसी के बाद भंडारी को जब गुजरात का राज्यपाल बनाया गया तब बलूनी की कर्मभूमि बनी गुजरात , यही वो दौर था जो बलूनी की किस्मत का भाग्य पलटने वाला साबित हुआ।
उस वक़्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे यही वह दौर था जब नरेंद्र मोदी के करीब आकर बलूनी ने अपनी काबिलियत और राजनीतिक रणनीतिकार की कुशलता का परिचय दिया । CM Anil Baluni अनिल बलूनी नरेंद्र मोदी के साथ काम करना शुरू कर दिया और अगले कुछ सालों के भीतर मोदी के भरोसेमंद लोगों की टीम में शामिल हो चुके थे ।
Cm anil baluni
भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने अनिल बलूनी की काबिलियत और महत्वाकांक्षा को गुजरात के दौरान ही भली-भांति समझ लिया था । लिहाजा जब अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो उन्होंने अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी जैसी बड़ी जिम्मेदारी देते हुए यह साबित कर दिया था कि CM Anil Baluni अनिल बलूनी आने वाले दिनों में पार्टी के लिए बड़ा नाम बन सकते हैं। अमित शाह के अध्यक्ष बनने के बाद अनिल बलूनी को पार्टी प्रवक्ता और मीडिया प्रकोष्ठ का प्रमुख बनाया गया । एक तरह से वह अमित शाह के कोर ग्रुप में शामिल हो गए थे। वह मीडिया संबंधी कार्यों को देखते रहे हैं। फिलहाल मोदी के मीडिया संबंधी कार्यक्रमों का प्रबंधन कुशलतापूर्वक करना उनकी बायोडाटा का सबसे प्रमुख हाईलाइटर बन गया।
पार्टी की छवि के खिलाफ कोई बात हो जाने पर अनिल बलूनी स्थिति को संभालने के लिए पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ मंत्रियों को समय-समय पर सलाह भी देते रहे हैं । CM Anil Baluni अनिल बलूनी पीएम मोदी और शाह के करीब बने रहने के लिए तमाम पार्टी हित में प्रयास करते रहे हैं जिसका परिणाम है कि आज सबसे प्रबल दावेदार अनिल बलूनी आज पार्टी की पसंद साबित हो रहे हैं। उन्हें उत्तराखंड जैसे प्रदेश में मुख्यमंत्री का ओहदा देकर उनकी काबिलियत को एक नई पहचान और ऊंचाई दी जा सकती है।
CM Anil Baluni
हालांकि ऐसा होता है तो अनिल बलूनी के लिए पहाड़ में पूरे 5 साल एक स्थाई और भरोसेमंद सरकार देना थोड़ा मुश्किल भी हो सकता है । क्योंकि जिस तरह से पार्टी के अंदर वरिष्ठ विधायकों के मन में नेतृत्व करने की ललक समय-समय पर दिखाई देती है, वह यह बताता है कि खेमेबाजी और गुटबाजी सिर्फ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के अंदर ही नहीं भाजपा के अंदर भी सुलग रही है । ऐसे में CM Anil Baluni की काबिलियत तब कसौटी पर होगी जब वह असंतुष्ट और खेमे बाजी में फंसे विधायकों और दिग्गज नेताओं को एक साथ बांधे रखने में सफल होते हैं । अगर बलूनी मुख्यमंत्री बनते हैं तो पूरे 5 साल तक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहते हुए प्रचंड बहुमत की सरकार चलाते हुए जनता की उम्मीदों को पूरा करना ही अनिल बलूनी के चयन को सही साबित कर सकेगा ।
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