Cosmetic Testing on Animals पार्टी हो या शादी, इंटरव्यू हो या डेटिंग, लड़कियां खूबसूरत दिखने के लिए अक्सर मेकअप करती हैं। जिस दिन काजल या आईलाइनर ना लगाएं, उस दिन हर कोई उन्हें बीमार बोल देता है। वहीं, लिपस्टिक भी स्माइल पर चार चांद लगा देती है। लेकिन आपको खूबसूरत बनाने के पीछे एक बदसूरत पहलू छुपा है जो कई मासूम जानवरों की जान ले रहा है। दरअसल ब्यूटी इंडस्ट्री के अधिकतर प्रोडक्ट केमिकल से बनते हैं जो जानवरों के शरीर से निकाले जाते हैं।
Cosmetic Testing on Animals इस लिस्ट में कई बड़े नामी मेकअप ब्रांड भी

- कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक मेकअप के अधिकतर प्रोडक्ट केमिकल से बनते हैं और ये केमिकल जानवरों से निकाले जा रहे हैं। कई बड़े नामी विदेशी मेकअप ब्रांड भी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि भारत में इस पर पाबंदी है। लेकिन कई देश ऐसा कर रहे हैं। चीन में सबसे ज्यादा कॉस्मेटिक्स के लिए जानवरों का इस्तेमाल किया जाता है।
Cosmetic Testing on Animals मछली से लेकर कीड़ों तक का हो रहा इस्तेमाल

- कोचीनियल बीटल: रेगिस्तान में कैक्टस के ऊपर अक्सर लाल रंग के कीड़े दिख जाएंगे। इन्हें कोचीनियल बीटल कहते हैं। इनसे लाल रंग निकलता है जो लिपस्टिक, ब्लश, आईशैडो बनाने में इस्तेमाल होता है।
- मछली की खाल: मछली की खाल यानी फिश स्केल से गुआनिन नाम का चमकीला केमिकल निकलता है। इससे ग्लिटर मस्कारा, हाईलाइटर, आईशैडो, नेल पॉलिश और ग्लोसी लिपस्टिक बनती है।

Cosmetic Testing on Animals - शार्क का लिवर: शार्क के जिगर से स्क्वैलिन निकाला जाता है। इसमें एंटी-एजिंग प्रॉपर्टीज होती है जो त्वचा को झुर्रियों से बचाती है। यह कई तरह के स्किन प्रोडक्ट में इस्तेमाल होता है। इससे लिप बाम, डियोड्रेंट और टैनिंग ऑयल भी बनता है।
- भेड़ के बाल: अगर आपको लगता है कि भेड़ के बालों से ऊन ही बनती है तो आप गलत हैं। इनके बालों में लानौलिन होता है जो त्वचा को मुलायम बनाता है। लानौलिन लिप बाम, ग्लॉस, हेयर कंडीश्नर, फेस क्रीम और बॉडी मॉइश्चराइजर में यूज होता है।
- लाख कीट: लाख कीट नाम का कीड़ा पीपल, पलाश, आम, शीशम जैसे कई पेड़ों पर दिखता है। इससे शैलैक निकलता है जो पीले रंग की राल होती है। चमदार होने के चलते, इसका इस्तेमाल नेल पॉलिश में होता है।

Cosmetic Testing on Animals
- Cosmetic Testing on Animals मछली की चर्बी: आपने कई एंटी-एजिंग प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों में कोलेजन नाम सुना होगा। यह झुर्रियों को कम करता है और त्वचा को जवान रखने में मदद करता है। यह एक प्रोटीन होता है जो गाय और मछली के टिशू और हड्डियों से निकाला जाता है।
- सुअर का पेट: साबुन, हेयर प्रोडक्ट और डियोड्रेंट बनाने के लिए स्टीयरिक एसिड का इस्तेमाल होता है जो सूअर के पेट से मिलता है।
- प्रेग्नेंट घोड़ी के यूरिन से बनता है परफ्यूम – महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन होता है जो उनके पीरियड्स से लेकर सेक्स लाइफ में मदद करता है। लेकिन यही हार्मोन परफ्यूम बनाने के लिए भी इस्तेमाल होता है। एस्ट्रोजन को प्रेग्नेंट घोड़ी के यूरिन से निकाला जाता है। वहीं, मेकअप प्रोडक्ट में वनिला की खुशबू के लिए गाय के गोबर का इस्तेमाल होता है।

Cosmetic Testing on Animals हर साल मारे जाते हैं 1 लाख नेवले
- मेकअप ब्रश बनाने के लिए लोमड़ी, घोड़ा, बकरी, नेवले और गिलहरी के बाल इस्तेमाल होते हैं। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अनुसार पेंटिंग और मेकअप ब्रश बनाने के लिए हर साल भारत में 1 लाख से ज्यादा नेवलों को मार दिया जाता है। भारत की बात करें तो 2020 में नए कॉस्मेटिक्स नियम के बाद से जानवरों से बने या उन पर टेस्ट किए गए मेकअप प्रोडक्ट बैन हुए। इनका आयात भी पूरी तरह बंद कर दिया गया। दक्षिण एशिया में ऐसा करने वाला भारत पहला देश बना।
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