Story By : Anita Tiwari , Dehradun

Political Drama 2022 विधानसभा चुनाव में एक चमत्कारिक जीत दर्ज करते हुए भाजपा ने पहाड़ में वापसी कर सरकार बनाई और हार कर भी जीत गए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी … तब लोगों ने यह मान लिया था की प्रचंड बहुमत पाकर दोबारा सत्ता में वापसी करने वाले सीएम धामी उस परंपरा को तोड़ देंगे , उस रिवायत को पीछे छोड़ देंगे जो उत्तराखंड की जनता ने राजनीतिक ड्रामेबाजी और खेमे बाजी की आड़ में बीते 22 सालों में देखी थी
Political Drama : अंदरखाने दरार और तकरार

- Political Drama दरअसल भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन ही सबसे बड़ी ताकत है। यही वजह है कि कार्यकर्ता , नेता , विधायक, मंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री भी कभी पार्टी लाइन और अपने वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कुछ भी मन में होते हुए भी नहीं बोलते हैं। यही अनुशासन और राजनीतिक मजबूरी उन्हें मजबूत बनाती है। पहले 100 दिन पांचवे गियर में दौड़ने वाली धामी सरकार के इर्द-गिर्द तरह-तरह की चुनौतियां मुंह उठाने लगी है। जिस तरह अग्निवीर भर्ती को लेकर प्रदेश के सबसे कद्दावर और प्रभावशाली कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय राज्य अजय भट्ट को चिट्ठी लिखकर युवाओं के निराश होने और भर्ती में गड़बड़ी की आशंका जाहिर की वह अजीब घटना लगती है।

- Political Drama दरअसल उत्तराखंड में चिट्टियां और नाराजगी किसी भी बड़े तूफान के पहले का इशारा रही है। फिर वह बात चाहे हरदा और बहुगुणा के बीच चिट्ठियों की जंग की करें या भाजपा के दौर के सरकारों की उठापटक की …. यहां पर जब जब दिल्ली की ओर कोई चिट्ठी गई है तो उसने यह इशारा दे दिया है कि प्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं है। महाराज की चिट्ठी पर जिस तरह से केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया कि सभी भर्तियां नियम के मुताबिक हो रही है और कहीं कोई गड़बड़ी लगती है ही है ऐसे में सतपाल महाराज के उस पत्र का एक तरह से केंद्रीय मंत्री ने दो टूक जवाब दे दिया है ।

- Political Drama अब उसके बाद बात करते हैं मौजूदा यूकेएसएससी में हुए भर्ती घोटाले के सबसे बड़े कांड की जिसमें गाहे-बगाहे लोग सोशल मीडिया के जरिए एक पूर्व मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द पूरा ताना-बाना बुन रहे हैं। मीडिया में जिस तरह से इस घोटाले को तवज्जो मिल रही है और मुख्यमंत्री व्यक्तिगत तौर पर अब सीबीआई जांच कराने तक की बात कह रहे हैं तो ऐसे में लगता है कि यह घोटाला कई बड़े चेहरों को बेनकाब करने के लिए खोला जाना जरूरी है। बात विधानसभा और सचिवालय की भर्तियों में हुए घोटाले से भी जुड़ गई है। ऐसे में बहुत संभव है कि बीते 2017 से 22 तक की भाजपा सरकार के दौर में हुई भर्तियों का कच्चा चिट्ठा भी खुल जाए। ऐसे में सवाल तत्कालीन मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर भी उठ सकता है ऐसे में भला कौन चाहेगा कि गड़े मुर्दे उखाड़ ले जाएं। लेकिन लगता है धामी सरकार ने भ्रष्टाचारी मुर्दों में जान फूंक कर सच्चाई कबूल करवाने का मन बना लिया है।

Political Drama - Political Drama इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से जुड़ी बड़ी अफवाह दी उड़ाई गई। जिसमें बाकायदा एक पोलिटिकल डेलिगेशन ने डीजीपी उत्तराखंड को चिट्ठी देकर शिकायत की है। आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर पार्टी से बगावत करने की झूठी और बेबुनियाद खबरों को मिर्च मसाला लगाकर खूब परोसा गया। जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह एक धड़े का षड्यंत्र भी हो सकता है या तथाकथित दबाव की राजनीति। लेकिन अभी 1 साल भी नहीं हुआ है और दूसरी बार मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी के सामने चुनौतियां सर उठाने लगी है। फिर वह चाहे सरकार के अंदर हो , संगठन के इर्द-गर्द हो या वरिष्ठ नेताओं के आभामंडल से जुड़ी अफवाह हो।
- Political Drama उम्मीद की जानी चाहिए कि खटीमा हारकर चंपावत जीतने वाले चमत्कारी सीएम पुष्कर सिंह धामी इस तरह की चुनौतियों को भी जीत कर पूरे 5 साल के लिए अपनी काबिलियत, राजनीतिक कौशल और नेतृत्व क्षमता का कामयाब प्रदर्शन बरकरार रखेंगे
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