देहरादून से अनीता तिवारी की रिपोर्ट –

Bahuguna Bharat Ratnaहिमपुत्र व हिमालय का चंदन नाम से देश भर में ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी , उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व देश के पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की 34 वीं पुण्य तिथि पर आज उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं स्वर्गीय बहुगुणा के अनुयायी सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विभिन्न वर्गों के लोगों ने घण्टाघर स्थित बहुगुणा काम्प्लेक्स में स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया व सभा आयोजित कर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
Bahuguna Bharat Ratna बहुगुणा जी थे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी – धस्माना

Bahuguna Bharat Ratna इस अवसर पर धस्माना ने कहा कि बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हेमवती नंदन बहुगुणा के जीवन से आज के राजनेताओं को यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे समाज सेवा और राजनीति में रहते हुए प्रशाशनिक क्षमताओं विद्वता को प्रदर्शित करते हुए सर्वसमाज का हित किया जाता है। धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड के गढ़वाल में ख़िरसु के बुघाणी गांव में एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे एक बालक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ख़िरसु व माध्यमिक शिक्षा देहरादून के डीएवी इंटर कालेज से प्राप्त कर इलाहाबाद विश्विद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने व उसी दौरान छात्र राजनीति से भारत की आज़ादी के आंदोलन और फिर स्वतंत्र भारत में उत्तरप्रदेश की विधानसभा में इलाहाबाद जैसे जिले से विधायक बन कर पहुंचने और फिर 1973 में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचने की कहानी अपने आप में बहुगुणा जी के राजनैतिक कौशल की एक अदभुत गाथा है।
Bahuguna Bharat Ratna आपातकाल में इंदिरा गांधी जी से मतभेद फिर कांग्रेस से अलग हो कर कांग्रेस फार डेमोक्रेसी का गठन फिर उसका जनता पार्टी में विलय फिर मोरारजी भाई के साथ पॉट्रोलियं मंत्री फिर जनता पार्टी के विगठन और चंद महीने चौधरी चरण सिंह जी की सरकार में वित्त मंत्री रहने के बाद 1980 में कांग्रेस में वापसी। 1980 में हुए लोकसभा के मध्यावधि चुनाव में बहुगुणा पहली बार अपनी जन्मभूमि गढ़वाल से लोकसभा का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़कर भारी बहुमत से जीत कर लोकसभा पहुंचे। तब एचएन बहुगुणा को इंदिरा जी ने उनको कांग्रेस का मुख्य महासचिव बनाया था और इंदिरा गांधी के बाद दूसरे नम्बर के ताकतवर नेताओं में शुमार होने लगे थे।

Bahuguna Bharat Ratna लोकसभा चुनावों में अप्रत्याशित बड़ी जीत से कांग्रेस में समीकरण बदल गए और बहुगुणा जी को इंदिरा जी ने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जिसका कारण श्री बहुगुणा जी के संजय गांधी से मतभेद बताए जाते हैं। एक बार फिर बहुगुणा कांग्रेस से अलग हो कर नई पार्टी लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी बना कर फिर लोकदल में विलय और अन्तोगत्वा 1989 में 17 मार्च को स्वर्गलोक सिधारने तक का सफर।

यह 80 का दशक बहुगुणा के जीवन का सबसे कठिन व संघर्षों से भरा दशक रहा किंतु उन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और न वे कभी गलत बात पर सत्ता या पद के लिए झुके। धस्माना ने आगामी 25 अप्रैल को स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा जी की 104 वीं जयंती के अवसर पर राजधानी देहरादून में स्वर्गीय बहुगुणा जी की स्मृति में एक बड़ा आयोजन करने की घोषणा की।

- Bahuguna Bharat Ratna इस अवसर पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य सुमेर चंद रवि, कांग्रेस नेता कमर सिद्दीकी, राम कुमार थपलियाल, व्यापारी नेता सोम प्रकाश चौहान, नगर निगम पार्षद संगीता गुप्ता, शाहिद खान, ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष सरदार जसविंदर सिंह मोठी, शुभम सैनी, आनंद सिंह पुंडीर, डॉक्टर अंबेडकर युवा समिति के अवधेश कथिरिया, मेहमुदन, इकराम, पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति के प्रवीण कश्यप, कॉंग्रेस ब्लॉक यमुना कालौनी अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता,घनश्याम वर्मा, अनुराग गुप्ता, वस्ल्मीकि कल्याण परिषद के अध्यक्ष आदर्श सूद, उदयवीर पंवार, निहाल सिंह, फईम, सुभान अली समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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