Jarawa Tribe lifestyle अंडमान में रहने वाली जारवा नाम की जनजाति उनके समुदाय में पैदा होने वाले गोरे बच्चों को मौत के घाट उतार देते हैं. आपको बता दें कि जारवा जनजाति को दुनिया की सबसे पुरानी जनजातियों में गिना जाता है.
Jarawa Tribe lifestyle दुनिया की सबसे पुरानी जनजातियों में

- Jarawa Tribe lifestyle ज्यादातर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे गोरे रंग के हों. बच्चों का रंग गोरा करने के लिए गर्भवती मां तरह-तरह के नुस्खे इस्तेमाल करती है लेकिन आपको बता दें कि भारत में एक ऐसा भी समुदाय है, जहां पर गोरे बच्चे पैदा करना पाप माना जाता है. अगर यहां पर कोई गोरा बच्चा पैदा होता है तो उसे मार दिया जाता है. भारत के केंद्र शासित प्रदेश अंडमान में एक ‘जारवा’ नाम की जनजाति निवास करती है. इस जनजाति को दुनिया की सबसे पुरानी जनजातियों में शामिल किया जाता है. ‘जारवा जनजाति’ में एक क्रूर प्रथा प्रचलित है, अगर यहां किसी के घर में गोरे रंग का बच्चा पैदा होता है उसे मार दिया जाता है. यहां गोरे बच्चे को किसी अभिशाप के समान समझा जाता है.

Jarawa Tribe lifestyle Jarawa Tribe lifestyle क्या है यह क्रूर परंपरा?
- Jarawa Tribe lifestyle जारवा जनजाति को अफ्रीका का मूल निवासी माना जाता है. जनजाति में ज्यादातर लोग डार्क स्किन यानी काले रंग के हैं. ऐसे में अगर कोई महिला गोरे बच्चे को जन्म देती है तो उसे मार दिया जाता है, क्योंकि इन्हें लगता है कि वह बच्चा किसी और जनजाति से ताल्लुक रखता है. जारवा आदिवासियों में एक और अनोखी परंपरा देखने को मिलती है कि यहां पैदा हुए बच्चे को पूरे कबीले की महिलाओं का दूध पिलाया जाता है. सभी महिलाओं के स्तनपान कराने को लेकर कहा जाता है कि इससे समुदाय की शुद्धता बनी रहती है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यह जनजाति 90 के दशक में सामने आई लेकिन भारत सरकार ने इनकी तस्वीरों को खींचने या सोशल मीडिया पर अपलोड करने को लेकर सख्त कानून बनाए हैं. अगर कोई उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करते पाया जाता है तो उसे जेल जाना पड़ सकता है और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
Jarawa Tribe lifestyle अंधविश्वास की जड़ें काफी हैं गहरी
Jarawa Tribe lifestyle
- Jarawa Tribe lifestyle जारवा जनजाति में अंधविश्वास की जड़ें काफी गहरी हैं. यहां के लोग मानते हैं कि अगर किसी गर्भवती महिला को जानवर का खून पिलाया जाए तो उनका बच्चा काले रंग का पैदा होगा. यहां काले रंग के बच्चे को ही समाज में रहने की मान्यता मिलती है. आपको बता दें कि जारवा जनजाति मुख्यधारा के समाज से आज भी बिल्कुल अलग बिना कपड़ों के जिंदगी बिता रहा है और इस आदिवासी जनजाति में ज्यादातर लोग मछली का शिकार कर अपना जीवन यापन करते हैं.
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